पाठ्यक्रम: जीएस-3 / अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की विश्व निवेश रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत दो स्थान ऊपर चढ़कर वैश्विक स्तर पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का 11वाँ सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बन गया है। वर्ष 2025 में भारत में एफडीआई अंतर्वाह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
भारत का एफडीआई प्रदर्शन
- वर्ष 2025 में भारत ने 38.89 अरब अमेरिकी डॉलर का FDI आकर्षित किया, जो वर्ष 2024 के 27.09 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 44% की वृद्धि दर्शाता है।
- भारत में ग्रीनफील्ड निवेश: घोषित ग्रीनफील्ड निवेश का मूल्य वर्ष 2024 के 111.14 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर वर्ष 2025 में 74.12 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया।
- हालांकि, वर्ष 2025 में भारत ने विश्व की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड निवेश परियोजना आकर्षित की।
- अमेरिका स्थित अल्फाबेट इंक. (Alphabet Inc.) ने भारत में 14.5 अरब अमेरिकी डॉलर के डेटा सेंटर में निवेश की घोषणा की, जो वैश्विक सूची में सबसे ऊपर रही।
भारत का बाह्य FDI
- भारत का बाह्य FDI वर्ष 2024 के 24.26 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025 में 35.66 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो 47% की वृद्धि है।
- भारत ने प्रमुख निवेशक अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए FDI स्रोत देशों में वैश्विक स्तर पर 18वाँ स्थान प्राप्त किया।
- भारतीय कंपनियों द्वारा घोषित विदेशी ग्रीनफील्ड परियोजनाएँ 41% बढ़कर 25.29 अरब अमेरिकी डॉलर हो गईं।
- राणा समूह ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 10 अरब अमेरिकी डॉलर की ऑटोमोबाइल विनिर्माण सुविधा की घोषणा की, जो विश्व की शीर्ष पाँच ग्रीनफील्ड परियोजना घोषणाओं में शामिल थी।

अंतर्राष्ट्रीय निवेश प्रवृत्तियाँ
- भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान तथा कमजोर निवेश भावना के कारण वैश्विक FDI प्रवाह असमान बना रहा।
- विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में FDI अंतर्वाह में केवल 2% की वृद्धि हुई।
- विकासशील एशिया में 3% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई।
प्रमुख FDI गंतव्य:
- संयुक्त राज्य अमेरिका 2% की गिरावट के बावजूद 277 अरब अमेरिकी डॉलर के अंतर्वाह के साथ सबसे बड़ा FDI प्राप्तकर्ता बना रहा।
- चीन 104.66 अरब अमेरिकी डॉलर के साथ चौथे स्थान पर बना रहा, हालांकि वर्ष 2024 के 116.24 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में उसका FDI अंतर्वाह घट गया।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) क्या है?
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से तात्पर्य उस निवेश से है, जो विदेशी संस्थाओं (व्यक्तियों या कंपनियों) द्वारा किसी अन्य देश के व्यावसायिक हितों में, सामान्यतः उद्यमों में स्वामित्व या नियंत्रण के रूप में किया जाता है।
- वर्तमान में निम्नलिखित क्षेत्रों में FDI प्रतिबंधित है—
- लॉटरी,जुआ एवं सट्टेबाज़ी,चिट फंड,निधि कंपनी,रियल एस्टेट व्यवसाय,तंबाकू अथवा तंबाकू के विकल्पों से सिगार, चेरूट, सिगारिलो तथा सिगरेट का विनिर्माण।
- शुद्ध एफडीआई (Net FDI): यह देश में आने वाले विदेशी निवेश तथा विनिवेश एवं पूंजी की स्वदेश वापसी (Repatriation) के माध्यम से बाहर जाने वाली पूंजी के बीच का अंतर दर्शाता है।
- शुद्ध एफडीआई में कमी का यह अर्थ आवश्यक नहीं है कि निवेशकों की रुचि कम हुई है, क्योंकि सकल एफडीआई अंतर्वाह मजबूत बना रह सकता है।
भारत में FDI के मार्ग
- स्वचालित मार्ग (Automatic Route): यह वह प्रवेश मार्ग है, जिसके अंतर्गत निवेश के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अथवा केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती।
- विनिर्माण तथा सॉफ्टवेयर जैसे अधिकांश क्षेत्र इसी मार्ग के अंतर्गत आते हैं।
- सरकारी स्वीकृति मार्ग (Government Approval Route): यह वह प्रवेश मार्ग है, जिसके अंतर्गत निवेश के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है तथा इस मार्ग से प्राप्त विदेशी निवेश सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार होता है।
- दूरसंचार, मीडिया, औषधि तथा बीमा जैसे क्षेत्र इस मार्ग के अंतर्गत आते हैं।
वे क्षेत्र/गतिविधियाँ जिनमें FDI प्रतिबंधित है-
- सरकारी/निजी लॉटरी, ऑनलाइन लॉटरी आदि सहित लॉटरी व्यवसाय।
- जुआ एवं सट्टेबाज़ी, जिनमें कैसीनो आदि शामिल हैं।
- चिट फंड, निधि कंपनी, तथा हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDRs) का व्यापार।
- रियल एस्टेट व्यवसाय अथवा फार्म हाउस का निर्माण।
- ‘रियल एस्टेट व्यवसाय’ में टाउनशिप का विकास, आवासीय/वाणिज्यिक परिसरों, सड़कों अथवा पुलों का निर्माण तथा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के REIT विनियम, 2014 के अंतर्गत पंजीकृत एवं विनियमित रियल एस्टेट निवेश न्यास (REITs) शामिल नहीं हैं।
- तंबाकू अथवा तंबाकू के विकल्पों से सिगार, चेरूट, सिगारिलो तथा सिगरेट का विनिर्माण।
स्रोत: BS